बुधवार, मई 07, 2014

अकेलापन

  
अकेलापन  !
जब तुझसे  बांटा !
घटा  सन्नाटा !
-------------------------- हाईकू : डॉ. प्रतिभा स्वाति

मंगलवार, मई 06, 2014

gm / :)

                हट गए आसमां से ,
रात के काले  साए !
              पूरब में , क्षितिज पर ,
आके सूरज , मुस्काए !
.
.
.
---------------- डॉ. प्रतिभा स्वाती

गुरुवार, मई 01, 2014

ज़मी को ...

 ज़मीं  को / नाज़  है  बेहद :)
अपने / नीले आसमां  पर !

कभी चांदनी / ओढ़ाता  है :)
कभी /  धूप  की  चूनर  :)
-----------------------------  डॉ. प्रतिभा  स्वाति 

शनिवार, अप्रैल 26, 2014

भ्रमर हर ...



रस्ते नेक होने लगें तो...

  आरती  और  अजानें / अगर ,
  दोनों /  एक  होने  लगें तो !

  मज़हब कई /कई मंज़िलें,
 सब रस्ते/नेक होने लगें तो!

कोई कंस  या रावण  नहीं होगा !
रेखित सिया-आंगन नहीं होगा !

शाम / सूरज  जब  भी ढलेगा !
 हर दीप ख़ुश होकर  जलेगा !
------------------------------------ डॉ . प्रतिभा स्वाति 

बुधवार, अप्रैल 23, 2014

निर्भया ...

      कुत्सित.....  लोग !
   जिनके  दूषित  इरादे !
    या ख़ुदा !..... उनको ,
    तू......पत्थर  बनादे !!
------------------------------------- डॉ. प्रतिभा स्वाति 

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