अन्य विषय लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
अन्य विषय लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, दिसंबर 04, 2016

कबीर ....

गूगल से साभार 




दोहा   – या दुनिया दो रोज की, मत कर यासो हेत | गुरु चरनन चित लाइये, जो पुराण सुख हेत |
अर्थ   – इस संसार का झमेला दो दिन का है अतः इससे मोह सम्बन्ध न जोड़ो | सद्गुरु के चरणों में मन लगाओ, जो पूर्ण सुखज देने वाले हैं |
 दोहा   – गाँठी होय सो हाथ कर, हाथ होय सो देह | आगे हाट न बानिया, लेना होय सो लेह ||
अर्थ   – जो गाँठ में बाँध रखा है, उसे हाथ में ला, और जो हाथ में हो उसे परोपकार में लगा | नर-शरीर के पश्चात् इतर खानियों में बाजार-व्यापारी कोई नहीं है, लेना हो सो यही ले-लो |
दोहा   – कबीर तहाँ न जाइये, जहाँ सिध्द को गाँव | स्वामी कहै न बैठना, फिर-फिर  पूछै नाँव ||
अर्थ   – अपने को सर्वोपरि मानने वाले अभिमानी सिध्दों के स्थान  पर भी मत जाओ | क्योंकि स्वामीजी ठीक से बैठने तक की बात नहीं कहेंगे, बारम्बार नाम पूछते रहेंगे |
    दोहा   – देह खेह होय जायगी, कौन कहेगा देह | निश्चय कर उपकार ही, जीवन का फन येह ||
अर्थ   – मरने के पश्चात् तुमसे कौन देने को कहेगा ? अतः निश्चित पूर्वक परोपकार करो, यही जीवन का फल है |
दोहा   – या दुनिया दो रोज की, मत कर यासो हेत | गुरु चरनन चित लाइये, जो पुराण सुख हेत ||
अर्थ   – इस संसार का झमेला दो दिन का है अतः इससे मोह सम्बन्ध न जोड़ो | सद्गुरु के चरणों में मन लगाओ, जो पूर्ण सुखज देने वाले हैं |
कबीर दोहा  – ऐसी बनी बोलिये, मन का आपा खोय | औरन को शीतल करै, आपौ शीतल होय ||
हिन्दी अर्थ  – मन के अहंकार को मिटाकर, ऐसे मीठे और नम्र वचन बोलो, जिससे दुसरे लोग सुखी हों और स्वयं भी सुखी हो |
दोहा   – गाँठी होय सो हाथ कर, हाथ होय सो देह | आगे हाट न बानिया, लेना होय सो लेह ||
अर्थ   – जो गाँठ में बाँध रखा है, उसे हाथ में ला, और जो हाथ में हो उसे परोपकार में लगा | नर-शरीर के पश्चात् इतर खानियों में बाजार-व्यापारी कोई नहीं है, लेना हो सो यही ले-लो |
दोहा   –  धर्म किये धन ना घटे, नदी न घट्ट नीर | अपनी आखों देखिले, यों कथि कहहिं कबीर ||
अर्थ    – धर्म (परोपकार, दान सेवा) करने से धन नहीं घटना, देखो नदी सदैव बहती रहती है, परन्तु उसका जल घटना नहीं | धर्म करके स्वयं देख लो |
दोहा  – कहते को कही जान दे, गुरु की सीख तू लेय | साकट जन औश्वान को, फेरि जवाब न देय |
अर्थ   – उल्टी-पल्टी बात बकने वाले को बकते जाने दो, तू गुरु की ही शिक्षा धारण कर | साकट (दुष्टों)तथा कुत्तों को उलट कर उत्तर न दो |
दोहा  – कबीर तहाँ न जाइये, जहाँ जो कुल को हेत | साधुपनो जाने नहीं, नाम बाप को लेत ||
अर्थ – गुरु कबीर साधुओं से कहते हैं कि वहाँ पर मत जाओ, जहाँ पर पूर्व के कुल-कुटुम्ब का सम्बन्ध हो | क्योंकि वे लोग आपकी साधुता के महत्व को नहीं जानेंगे, केवल शारीरिक पिता का नाम लेंगे ‘अमुक का लड़का आया है’ ||
दोहा   – जैसा भोजन खाइये, तैसा ही मन होय | जैसा पानी पीजिये, तैसी बानी सोय ||
अर्थ   – ‘आहारशुध्दी:’ जैसे खाय अन्न, वैसे बने मन्न लोक प्रचलित कहावत है और मनुष्य जैसी संगत करके जैसे उपदेश पायेगा, वैसे ही स्वयं बात करेगा | अतएव आहाविहार एवं संगत ठीक रखो |
दोहा   – कबीर तहाँ न जाइये, जहाँ सिध्द को गाँव | स्वामी कहै न बैठना, फिर-फिर  पूछै नाँव ||
अर्थ   – अपने को सर्वोपरि मानने वाले अभिमानी सिध्दों के स्थान  पर भी मत जाओ | क्योंकि स्वामीजी ठीक से बैठने तक की बात नहीं कहेंगे, बारम्बार नाम पूछते रहेंगे |
दोहा   – इष्ट मिले अरु मन मिले, मिले सकल रस रीति | कहैं कबीर तहँ जाइये, यह सन्तन की प्रीति ||
अर्थ   – उपास्य, उपासना-पध्दति, सम्पूर्ण रीति-रिवाज और मन जहाँ पर मिले, वहीँ पर जाना सन्तों को प्रियकर होना चाहिए |
दोहा   – कबीर संगी साधु का, दल आया भरपूर | इन्द्रिन को तब बाँधीया, या तन किया धर ||
अर्थ   – सन्तों के साधी विवेक-वैराग्य, दया, क्षमा, समता आदि का  दल जब परिपूर्ण रूप से ह्रदय में आया, तब सन्तों ने इद्रियों को रोककर शरीर की व्याधियों को धूल कर दिया | अर्थात् तन-मन को वश में कर लिया |
दोहा   – गारी मोटा ज्ञान, जो रंचक उर में जरै | कोटी सँवारे काम, बैरि उलटि पायन परे || कोटि सँवारे काम, बैरि उलटि पायन परै | गारी सो क्या हान, हिरदै जो यह ज्ञान धरै ||
अर्थ    – यदि अपने ह्रदय में थोड़ी भी सहन शक्ति हो, ओ मिली हुई गली भारी ज्ञान है | सहन करने से करोड़ों काम (संसार में) सुधर जाते हैं, और शत्रु आकर पैरों में पड़ता है | यदि ज्ञान ह्रदय में आ जाय, तो मिली हुई गाली से अपनी क्या हानि है ?




शनिवार, नवंबर 12, 2016

लो आ गए हम .....


ज्यादा  प्रसन्न न हों , ये नकली नोट है !
__________आजकल समाचार और अफ़वाह में मामूली फ़र्क रह गया है  यदि ऐसा है भी तो .... किम आश्चर्यम ? मै लिंक दे रही हूँ  ---------- आप अपने विवेक से काम लें . जयहिंद !



शुक्रवार, अक्टूबर 07, 2016

जय मां ...

 नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः ।
नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्म ताम् ॥१॥
रौद्रायै नमो नित्यायै गौर्यै धात्र्यै नमो नमः ।
ज्योत्स्नायै चेन्दुरूपिण्यै सुखायै सततं नमः ॥२॥
कल्याण्यै प्रणता वृद्धयै सिद्धयै कुर्मो नमो नमः ।
नैर्ऋत्यै भूभृतां लक्ष्म्यै शर्वाण्यै ते नमो नमः ॥३॥
दुर्गायै दुर्गपारायै सारायै सर्वकारिण्यै ।
ख्यात्यै तथैव कृष्णायै धूम्रायै सततं नमः ॥४॥
अतिसौम्यातिरौद्रायै नतास्तस्यै नमो नमः ।
नमो जगत्प्रतिष्ठायै देव्यै कृत्यै नमो नमः ॥५॥
या देवी सर्वभुतेषु विष्णुमायेति शब्दिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥६॥
या देवी सर्वभुतेषु चेतनेत्यभिधीयते ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥७॥
या देवी सर्वभुतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता । 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥८॥
या देवी सर्वभुतेषु निद्रारूपेण संस्थिता । 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥९॥
या देवी सर्वभुतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता । 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥१०॥
या देवी सर्वभुतेषु छायारूपेण संस्थिता । 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥११॥
या देवी सर्वभुतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता । 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥१२॥
या देवी सर्वभुतेषु तृष्णारूपेण संस्थिता । 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥१३॥
या देवी सर्वभुतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता । 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥१४॥
या देवी सर्वभुतेषु जातिरूपेण संस्थिता । 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥१५॥
या देवी सर्वभुतेषु लज्जारूपेण संस्थिता । 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥१६॥
या देवी सर्वभुतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता । 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥१७॥
या देवी सर्वभुतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता । 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥१८॥
या देवी सर्वभुतेषु कान्तिरूपेण संस्थिता । 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥१९॥
या देवी सर्वभुतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥२०॥
या देवी सर्वभुतेषु वृत्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥२१॥
या देवी सर्वभुतेषु स्मृतिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥२२॥
या देवी सर्वभुतेषु दयारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥२३॥
या देवी सर्वभुतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥२४॥
या देवी सर्वभुतेषु मातृरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥२५॥
या देवी सर्वभुतेषु भ्रान्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥२६॥
इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भुतानां चाखिलेषु या ।
भूतेषु सततं तस्यै व्याप्तिदेव्यै नमो नमः ॥२७॥
चितिरूपेण या कृत्स्नमेतद्व्याप्य स्थिता जगत् ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥२८





विसृष्टौ सृष्टिरूपा त्वं स्थितिरूपा च पालने ।
तथा संहृतिरूपान्ते जगतोऽस्य जगन्मये ॥

हे जगन्मयी देवि! इस जगत की उत्पत्ति के समय तुम सृष्टिरूपा हो और पालनकाल में स्थितिरूपा हो।
हे जगन्मयी माँ! तुम कल्पान्त के समय संहाररूप धारण करने वाली हो।॥
__________________________________________________________________




शनिवार, नवंबर 28, 2015

विदेश, जहाँ भारतीय डिग्री मान्य नहीं

              पिछले दिनों canada और u .s. के कुछ मित्रों से बात हुई  , हमारे docters  वहां जाकर वहां की डिग्री के लिए मशक्कत करते हैं , यहाँ की डिग्री वहां मान्य नहीं .
----------------- अब ये मत पूछियेगा कि इस दरमियान वो पढाई के साथ ,अपने गुज़ारे के लिए वहां क्या करते
हैं ?  
 










मंगलवार, अक्टूबर 06, 2015

मात्सुओ बाशो



-----------  ये जो चित्र देख रहे हैं आप , इसके बारे में बहुत सारी जानकारी मुझे है :) जब मैं हाइकूकार होती हूँ तो मुझे लगता है ,ये मेरे दादा की तरह हैं .क्यूंकि आज हाइकू जगत में जितने भी पितृपुरुष हैं , उनकी कुंठाएं उन्हें , पूर्वाग्रह से मुक्त नहीं होने देतीं !
------ इसकी वज़ह ?
__________ डॉ . प्रतिभा स्वाति


सोमवार, दिसंबर 29, 2014

महाभारत में व्यूह रचना


         उस कलह - युद्ध के बाद / चिताओं की राख़ भले ठंडी हो गई हो ! पर वो आग़ आज भी धधक रही है !





गुरुवार, दिसंबर 25, 2014

हनुमानाष्टक....


         हनुमानाष्टक  comments  में  दूंगी . जिससे उसे ठीक से पढ़ा जा सके और कॉपी भी की जा सके ! इसे  मैंने u tube के लिए क्म्पोज़ भी किया है ! next post / उसी vdo का है ! ---------- thnx

















 




























































शुक्रवार, सितंबर 26, 2014

हाइकू : इमाम मेहँदी / मुर्दाबाद

हाइकू : इमाम मेहँदी / मुर्दाबाद:

_______________________________________________________     हिन्दुस्तान की ज़मी धन्य है / जहाँ हर मज़हब को दिल से इज्ज़त और अधिकार .........



गुरुवार, अगस्त 14, 2014

जयहिंद


     कदम- दर -कदम देश तरक्की कर रहा है !  और हालात  हैं की दिनोदिन गर्त से रूबरू हो रहे हैं ! आख़िर  कहाँ हम गलती कर रहे हैं ? कहाँ हो रही है चूक ?
-------------- असलियत जो भी हो ! वजहें जो भी हों ! हम अपने वतन से मोहब्बत के जज़्बे को दिल में धडकन की तरह संजोए हैं ! 
---------------------------------- जयहिंद

हमारा राष्ट्र ध्वज ...


       क्या ये चित्र हमारी जिज्ञासा को हवा नहीं देता  ? की हम इतिहास के उन प्रष्ठों को पलटकर  देखें की आखिर उनमें / कौनसी कहानी करवटें ले रही है !
_________________ जयहिंद

गुरुवार, जुलाई 17, 2014

eva braun


   कई बार लगता है मुझे , की काश मुझे वो सब मालूम होता जो मैं जानना चाहती हूँ !
----------- जानकारी हासिल करने का एक सशक्त माध्यम है पूछताछ -------- :) सही समझा आपने / मुझे बताइए eva के बारे में !
________ मुझे सिर्फ़ इतना ही मालूम है अभी की वे हिटलर की पत्नी थीं ! १९४५ तक जीवित रह पाई थीं ! 
____________ डॉ. प्रतिभा स्वाति

बुधवार, जुलाई 02, 2014

साइबर क्राइम

_______________________________________________________________________________


                            इस युग में -- साइबर क्राइम , शब्द लगभग ' कम्प्यूटर ' जितना ही पुराना है ! इसके ख़िलाफ़ कानून क्या कर पाता है या करता है / इसका प्रावधान है ,जब तक  इसकी जानकारी आम जन तक नहीं पहुँचती / अधिकार कानून की किताबों में कसमसाते रहेंगे ! खबरें हैं ! वो भी सब तक पहुंच जाएँ /तो थोड़ी जागरूकता आ सकती है ! आनी भी चाहिये !कुछ जानकारी page से दे रही हूँ !
___________________ डॉ . प्रतिभा स्वाति
__________________________________

________________________________________________________________________


  •                  अगले कुछ वर्षों में कंपनियों में वित्तीय धोखाधड़ी की दूसरी सबसे बड़ी वजह साइबर अपराध बन सकती है  *
  • ________________________________
  •  पिछले तीन साल के दौरान साइबर अपराध के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई   *
  • ___________________________________


    1. . साइबर अपराधियों ने नौकरी डॉट कॉम की साइट हैक करने की कोशिश. नौकरी डॉट कॉम ने कहा कि संदिग्ध रूसी साइबर अपराधियों ने इस महीने की शुरूआत में उसकी वेबसाइट हैक करने की कोशिश की। *
    2. ________________________________

      1. नई दिल्ली। भारत पर अब साइबर क्राइम का साया मडरा रहा है। साइबर क्राइम के तहत दर्ज होने वाले मामलों में में ५१ प्रतिशत इजाफा हुआ है।  *
      2. _____________________________
    3. . साइबरआतंकवाद एक वाक्यांश है / जिसका उपयोग आतंकवादी गतिविधियों में इंटरनेट आधारित हमलों का वर्णन करने के लिए किया जाता है,  *
    4. _______________________________
    5. कमेंट में बताने की कोशिश करुँगी कि / उपाय या निराकरण के लिये / या समस्या के हल के लिये ,क्या किया जाना चाहिये ! :)

  • रविवार, जून 29, 2014

    साकेत


        जितना सुकून रामायण पढ़कर मिलता है उतनी ही ख़ुशी '  पंचवटी ' और 'साकेत ' पढ़कर भी ! हालाकि  गुप्तजी भक्तिकाल में नहीं गिने जाते ! रामभक्ति धारा के प्रमुख कवियों में तुलसी ही सर्वोपरि रहेंगे !
    ----------------------- परंतु ये सच है कवि की रचना को हम काल की विभाजन रेखा में नहीं बांध सकते ! न ही कवि को विषय -विशेष के लिये बाध्य किया जा सकता है ! 
    -------------------------- मुझे मज़बूर करते हैं साकेत के अंश / की उन्हें  अपनी रूचि के मुताबिक blog पर सहेज लूँ और साहित्य से  दूर होती इस नवयुवा जमात को उन मुक्तकों की चमक  बार -2 दिखाऊँ जो आज भी उनको 
    चकाचौंध करने का दम रखती है !
    -------------------------- अपनी पसंद से / साकेत के कुछ अंश दे रही हूँ ---------- इसे राम के लिये आस्था समझिये या कवि के लिये आदर ......सादर ....
    ------------------------  डॉ . प्रतिभा स्वाति 
    ________________________


    मंदिरस्था कौन यह देवी भला? 
    किस कृती के अर्थ है इसकी कला? 
    स्वर्ग का यह सुमन धरती पर खिला; 
    नाम है इसका उचित ही "उर्मिला"। 

    __________________________________________
      नाक का मोती अधर की कांति से, 
    बीज दाड़िम का समझ कर भ्रांति से, 
    देख कर सहसा हुआ शुक मौन है;
    सोचता है, अन्य शुक यह कौन है?" 
    _________________________________________
      बिदा होकर प्रिया से वीर लक्ष्मण--
    हुए नत राम के आगे उसी क्षण।
    हृदय से राम ने उनको लगाया,
    कहा--"प्रत्यक्ष यह साम्राज्य पाया।" 

     ___________________ 



     शेष मोती / समन्दर से चुन-चुनकर / कॉमेंट्स में देती

     रहूंगी :)









    मंगलवार, जून 24, 2014

    भक्ति


    ________________________________________________________
        " भक्ति शब्द की व्युत्पत्ति 'भज्' धातु से हुई है----------- जिसका अर्थ 'सेवा करना' या 'भजना' है, अर्थात् श्रद्धा और प्रेमपूर्वक इष्ट देवता के प्रति आसक्ति।
    ________________________________________________________________
    भक्ति के लिये / आस्था चाहिये / समर्पण चाहिए।
    हम अराध्य को चाहे जिस रूप में ढूंढ सकते हैं। 
    ___________________________________________________________
     भक्ति योग में / 11 अवस्थाओं का उल्लेख है 
    __________________________________________________
     - हिन्दी साहित्य में भक्तिकाल 1375 वि0 से 1700 वि0 तक जाना जाता है।
     हिन्दी साहित्य का मध्यकाल भक्तिकाल के नाम से प्रसिद्ध है।
    ______________________________________________________
                                                                                                प्रस्तुति : डॉ. प्रतिभा स्वाति

    जन - गण -मन





      ________________________________
    जन गण मन, भारत का राष्ट्रगान है जो मूलतः बंगाली में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर द्वारा लिखा गया था । ये हम सभी जानते हैं 
    ------------
    राष्ट्रगान के गायन की अवधि लगभग ५२ सेकेण्ड है । कुछ अवसरों पर राष्ट्रगान संक्षिप्त रूप में भी गाया जाता है, इसमें प्रथम तथा अन्तिम पंक्तियाँ ही बोलते हैं जिसमें लगभग २० सेकेण्ड का समय लगता है। संविधान सभा ने जन-गण-मन को भारत के राष्ट्रगान के रुप में २४ जनवरी, १९५० को अपनाया था। इसे सर्वप्रथम २७ दिसम्बर, १९११ को कांग्रेस के कलकत्ता अब दोनों भाषाओं में (बंगाली और हिन्दी) अधिवेशन में गाया गया था। पूरे गान में ५ पद हैं।
    ____________________ 
    जनगणमन-अधिनायक जय हे भारतभाग्यविधाता!
    पंजाब सिन्धु गुजरात मराठा द्राविड़ उत्कल बंग
    विन्ध्य हिमाचल यमुना गंगा उच्छलजलधितरंग
    तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मागे,
    गाहे तव जयगाथा।
    जनगणमंगलदायक जय हे भारतभाग्यविधाता!
    जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे।।
    -------------------------- जयहिंद 
    ------------------------------------------------------ प्रस्तुति : डॉ. प्रतिभा स्वाति



    ___________________________________________________________________

    Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...