शुक्रवार, दिसंबर 08, 2017

सवाल ....

  पंकज ---
------------------ सवाल  , पंकज  का नहीं , तमाम  उन पुरुषों का है , जो उस जैसे हैं :) समाज  से रुष्ट ! समाज  को ठेंगा  दिखाने को उद्यत  ... आतुर ... तत्पर ...
         क्या  अंतर  का खालीपन  ऐसा  होता  है ? भीतर  के  बवाल से लबरेज हो जाने की परिणिति ऐसी होती  है ? एक  सामान्य  सहज जीवन न जी पाने से उत्पन्न  कुंठा ? पीड़ा  को  ख़ुशी  में लपेटने  की  कोशिश ? यथार्थ  से आँख मींच  लेना ?   एक  दाह ....  भभकती  आग  जो  सब  कुछ  भस्म  कर देना  चाहती  है , मगर  चुपके  से ! चाहे  वह  किसी की  निर्दोष  हंसी  हो . चाहे  किसी का बहुमूल्य  वक्त .  किसी  की सद्भावना  और सहायता का  जहाँ कोई मोल नही .
       पंकज  को  जानने  वालों  की  राय  ,उनके  पक्ष  में   बिलकुल नहीं .  मतलब  हो तब  ही  कोई  मिलता  है  मज़बूरी  में . या  कोई  अनजाने  ही  उनकी  चपेट में आ  जाए तो ,हो  जाती  है  मुलाकात . 
        क्या  कोई  इतना बुरा  हो  सकता  है , कि  लोग  कतराने  की  हद  पार  कर  जाएँ  ? 63  साल  का  बन्दा अब  अकेला  है घर  में . 2017 में  पत्नी  गुजर  गई . बेटे  ने  लवमेरिज  की शायद   त्रिवेन्द्रम  में  है ,अपनी  पत्नी  और  दो  बेटियों  के साथ ! बेटी  30  के आसपास  की  है ,उसकी  शादी  3 साल पहले  हुई थी अब तो उसका  तलाक  भी  हो गया ,दिल्ली  में जॉब  कर  रही  है .और  हमारे  पात्र  पंकज  आगरा  में  लोगों  को पका  रहे  हैं !
लोगो  का  कहना  है ____  बहुत  बोलते  हैं  भई  ,अपने  आगे किसी  की सुनते  ही नही ! कोई कहता है __ इतना बड़ा  बकैत  ,यार फ़ोन  करने में डर लगता  है , चिपकू है स्याला ... सठिया  गया  है . कोई  कहता है __ अंकल झूठ बहुत बोलते ,किसी  का कहना है __ निरर्थक  वार्ता में  पारंगत हैं पंकज और अपनी लम्बी  बात के बीच में कोई बोले तो उसे गाली तक दे  डालते हैं ,भला  ये कहाँ का मैनर्स  है ?
            वैसे  लोग बोलते  तो  सच  ही है .पतले - 2 हाथ -  पैर , बाहर  निकला बड़ा - सा पेट , गंजा होता  सिर और थोड़ा   लंगड़ाती  चाल वाले वे ,जब अपने आपको  हैण्डसम  कहें , शादी - बारात में  डांस करें तब कोई कैसे   झेले ? वे खाने - पीने के शौक़ीन  हैं .
___________ मेरा पात्र इतना बुरा ? ना जी ना :) वे  खाना  अच्छा बनाते  हैं , चाय  बहुत  ही अच्छी . सुबह 4 बजे  जागते  हैं . पौधों से बहुत लगाव है और..... बस :)     
 आप  मिलना  चाहेंगे पंकज से ? नहीं ? आख़िर  क्यूँ  नहीं ? वे आपको मिल सकते हैं  वाट्सप पर और शादी डॉट कॉम पर ..... :)
------------------- ( बिना  भूमिका के अपनी  कहानी  की  शुरुआत  के लिए मुआफ़ी  चाहूंगी , पर    {सवाल  - मेरा  कथा संग्रह } पात्र  आपसे  मुखातिब  हो रहे  हैं ! हर  रोज एक नया किरदार ! और  मैं    मिल रही  हूँ सबसे .... सच में )
____________________  डॉ . प्रतिभा स्वाति  


शनिवार, नवंबर 18, 2017

मंगलवार, सितंबर 12, 2017

मुद्राएँ ......


हमारा  शरीर  पंच - तत्वों से  बना है  ---------



हाथ की अंगुलियाँ  और अंगूठा इन पंच -तत्वों का ख़ुलासा  करते हैं  :)




  अंगुली और अंगूठे से मिलकर  बनाई  जाती  है योग और नृत्य  में -- "मुद्राएँ " 















शनिवार, जुलाई 29, 2017

मैं बीच की कड़ी हूँ .....

 मैं बस  यूँ ही ...
दरमियान  खड़ी  हूँ !
इधर माँ ,उधर  बेटी 
मैं बीच में खड़ी हूँ !


यहाँ  मैं माँ  हूँ ....
बेटी  नहीं  हूँ !
बेटी होकर देखूं ..
तब  माँ   नहीं हूँ !


जबसे  माँ   नहीं  हैं ...
मैं  बेटी  नहीं  हूँ  !
 पूछती  हूँ  खुदसे  ...
मैं हूँ ? या  नहीं  हूँ !

 माँ  और  बेटी ...
बेटी  और माँ  !
बिछुड़ना  नियति ...
रो रहा  आसमां !
__________________ डॉ . प्रतिभा स्वाति 

मंगलवार, जुलाई 18, 2017

ज़िन्दगी ....





 ज़िन्दगी ... तू  
मिली  ...सबको 
रही ... साथ 
पर .... तुझे  
मिला कुछ  नहीं ..... !

सबसे ... मिले 
शिकवे ...गिले 
चिरन्तन ... चले 
यही .... सिलसिले 

शब्द ... ख़ामोश 
अर्थ .... मौन 
बोलता  रहा कौन .... !

रहे ख़ुद .... अनजान से 
वंचित .... पहचान से 
कौन......  रहा - गुजरा 
सदा ..... दरमियान से 
 आए सभी ...... फ़िर 
उठ गए  जहान  से ...... !
ख़ुद से  अनजान  से ....!
________________________ डॉ. प्रतिभा स्वाति



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