मंगलवार, अक्तूबर 06, 2015

मात्सुओ बाशो



-----------  ये जो चित्र देख रहे हैं आप , इसके बारे में बहुत सारी जानकारी मुझे है :) जब मैं हाइकूकार होती हूँ तो मुझे लगता है ,ये मेरे दादा की तरह हैं .क्यूंकि आज हाइकू जगत में जितने भी पितृपुरुष हैं , उनकी कुंठाएं उन्हें , पूर्वाग्रह से मुक्त नहीं होने देतीं !
------ इसकी वज़ह ?
__________ डॉ . प्रतिभा स्वाति


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