गुरुवार, मई 01, 2014

ज़मी को ...

 ज़मीं  को / नाज़  है  बेहद :)
अपने / नीले आसमां  पर !

कभी चांदनी / ओढ़ाता  है :)
कभी /  धूप  की  चूनर  :)
-----------------------------  डॉ. प्रतिभा  स्वाति 
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