शुक्रवार, जुलाई 01, 2016

मैं ज़ुर्म का इक़बाल किये लेती हूँ

   
मैं  ज़ुर्म  का  .... आज  
इक़बाल  किये  लेती हूँ  !
सज़ा -मुक़र्रर से  पहले 
सवाल  किये  लेती  हूँ  !

वो  रोज़  करता  है  ख़ता 
मैं मुआफ़  किये  जाती हूँ !
दर्द  देके  रोज़  ख़ुदको ,
क्या  इंसाफ किये  जाती हूँ ?
---------------------- डॉ .प्रतिभा  स्वाति 

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