मंगलवार, फ़रवरी 10, 2015

दुःख .....


_________________देखा जाए तो, हमारी हिंदी में हर शब्द का अर्थ बड़ा व्यापक और  सारगर्भित है . एक शब्द के तमाम अर्थ निकलते हैं ! तमाम पर्यायवाची होकर समानान्तर  चलते हैं . ऐसे में कई बार लेखक कहता कुछ है और समझा कुछ जाता है :)
_______________ अमूमन जब हिंदी में हाइकू लिखे जाते हैं तब ! क्यूंकि हर बार उन 3 लाइंस और 17 अक्षर की कविता की व्याख्या करना सम्भव नहीं होता ! हिंदी में बिंब हैं , अलंकार हैं शब्द- शक्तियाँ और शब्द- शैली है :) और फ़िर जब बात काव्य की हो तब , उसे तर्क पर कसना कि _______ चाँद को मामा क्यूँ कहा ? और बिल्ली को मौसी क्यूँ ? केश को घटा क्यूँ कहा और मुख को चाँद क्यूँ ?
________________ काव्य और कवि दोनों इन सवालों के समाधान प्रस्तुत कर सकते हैं ! तर्क को आधार बना सकते हैं . लेकिन किसी post के comments में अपने आप को प्रमाणित करने के लिए , यदि वक्त जाया करते हैं , तो नुकसान किसका है ?
______________ आज मुझे उसी वक्ती नुकसान की फ़िक्र है , ( जिसका ज़िक्र है ) लेकिन सवालों के जवाब देना मेरा दायित्व है ! जवाब हैं भी __________फ़िलहाल नहीं है तो सिर्फ़ वक्त ! बस इन्हीं बातों की तकलीफ़ है , दर्द है , गम है ...........और दुःख  है :)
________________ डॉ. प्रतिभा स्वाति

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