रविवार, मई 22, 2016
शुक्रवार, मई 20, 2016
मुझे मालूम है ...मेरे फ़राइज़ क्या हैं ....
झूठ या सच
.......................
दोनों से बच !
__________________ देखने में यूँ लगता है जैसे मैं हाइकू लिखने में असमर्थ हूँ :) बीच की लाइन जो गायब है ! वहां के सात वर्ण कहाँ हैं ? क्यूँ मौन पसरा है सच और झूठ के बाद ?
_________________ ये बात तो वही बताए जो तीनों ही से गुजरा हो ! अर्थात ...... यहाँ मेरा मक़सद सिर्फ़ ख़ुद के आगे ख़ुद को ज़ाहिर करना होता तो मैं सिर्फ़ ' मौन ' की बात करती . उस 'मौन ' की जिसे मैंने बड़ी ईमानदारी और हिम्मत से जिया . एक लम्बे अरसे का मौन . जिसे मैनें ख़ुद चुना था . यदि कोई भी फ़ैसला ,मज़बूरी में लिया जाए तब ईमानदारी पर प्रश्न उठाए जा सकते हैं .और जब फ़ैसलों पर सवाल उठने लगें तब लौटना पड़ता है - पीछे की तरफ़ . तभी हम आगे का सफ़र तय कर सकते हैं . यानि जो भी योजना हो उसपर अमल से पहले उसके परिणाम के बारे में विचार किया जाना ज़ुरूरी है ---- " बिना विचारे जो करे ....
__________ तब ? हम विचार क्यूँ नहीं करते ? कहाँ गई हमारी चिंतनशील प्रवृत्ति ? हम कैसे ध्यान से विमुख हो गए ? हम भेड़चाल से कभी तो उबेंगे ! तब ?आज mob .और tv ने हमारे मुंह - कान -आँख पर जो कब्ज़ा किया हुआ है , परोक्ष रूप से अतिक्रमण दिमाग और दिल पर हुआ है ! सोच और समझ पर हुआ है ! इस व्यस्तता और वाचालता ने सुविधा के नाम पर मुहैया इन उपकरणों की उपयोगिता और आविष्कार का मज़ाक उड़ाया है !
________________ आज हम भले आँख मूंद लें कबूतर की तरह , तो क्या बिल्ली झपट्टा नहीं मारेगी ? अरे हम इनसान हैं . हमारे पास दिमाग है . हमें ख़ुद का भला -बुरा सोचना होगा . उसके लिए वक्त निकलना होगा . भीड़ से परे ....ख़ुद के लिए ...औरों के लिए ....समाज के लिए ,देश और राष्ट्र के लिए ! हम हमेशा परिकथा से दिल नहीं बहला सकते ! कब तक तितली के पीछे भागेंगे ?
___________ हमारे आर्य हमें जो दिशा दे गए उसमें काल के मद्देनज़र ज़रासे संशोधन की ,नहीं कुछ और add किये जाने की दरकार है ! पहल हमे करनी होगी .....हम जो अपनेआप को समझदार होने के खोल में छुपाए बैठे हैं ! हम जो सिर्फ़ शिकायत करना जानते हैं ! हम जो कभी ख़ुद को कुसूरवार नहीं मानते ! लेकिन इस बात से अनजान कब तक रह पाएँगे ....एक दिन यही बच्चे हमें कुसूरवार कहके कटघरे में खड़ा कर देंगे की हमने उनको दिया क्या है ? समझाया क्यूँ नहीं ? रोका क्यूँ नहीं ? बताया क्यूँ नहीं ?
___________________ तब हमारे पास ख़ुद को बरी करने के कितने प्रमाण हैं ?
___________________________ डॉ . प्रतिभा स्वाति
मंगलवार, मई 17, 2016
25 हाइकू
_____1_______
मन मयूर
उदास मज़बूर
बादल दूर
______2_________
शब्द रूठे हैं
कह रहे मुझसे
अर्थ झूठे हैं
______3____________
मधुर बात
सदा कह मुख से
रह सुख से
______4____________
हंसा - मुस्काया
उठ गया सोकर
गुलमोहर
_______5________________
चाँद कातिल
तारों का सरहाना
उसे हासिल
_______6________________
भोले शंकर
है क्रोध भयंकर
ॐ जपाकर
_______7________________
मै सीधी -सादी
तुम छल -प्रपंच
ये रंगमंच
________8_____________
आँखें देखतीं
ख़्वाब कितने सारे
बिना विचारे
_________9_______________
उसकी चाह
रोज़ देती दस्तक
मन की राह
__________10_____________
मन चन्दन
सुरभित जीवन
अभिनन्दन
___________11_________________
टूटते रहे
सितारे गगन में
मेरे मन में
____________12____________________
खत संदेश
बसे जाए विदेश
भिजवाते हैं
____________ 13__________
दरअसल
सच छुपता रहा
झूठ ने कहा
___________14__________
मैं तुम या वो
कविता का विषय
कुछ और हो
__________15_______
योग समाधि
जीवन मायाजाल
वार्धक्य व्याधि
_________16 ________
है तनहाई
अंतर भीड़ भरा
रूह गंवाई
________17 _______
जीवन चक्र
तन क्षुधा जरासी
मन सन्यासी
___________18 _________
आत्मा अमर
ये संसार समर
जीव नश्वर
___________19________
आर्यों ने दिए
संस्कार के गहने
कौन पहने
___________20_________
इबादत में
हो आस्था समर्पण
जो आदत में
_________21______
मन का डर
नहीं छोड़ता पीछा
जीवनभर
_________22 ________
गूंजते रहे
विचारों के अंगना
गीत कंगना
__________23 _______
मनभावन
सारे रिश्ते पुराने
आए बुलाने
__________24________
नैन या सीप
रोज़ मोती बहाते
वो याद आते
__________25_________
शीशमहल
कैद राजकुमारी
विपदा भारी
____________________
__________________________ डॉ . प्रतिभा स्वाति
रविवार, मई 15, 2016
मेरा परिचय .....
नाम ---
पिता का नाम ___
जन्म स्थान---
पता ____
जन्म तारीख ---
शिक्षा ----
व्यवसाय ---
उपलब्धि ----
अनुभव ----
अभिरुचि ----
अन्य /विशेष __
_________________________________________ या फ़िर
कन्या का नाम __
राशि __
गोत्र ___
.
.
.
____________ या फ़िर फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल में जो परिचय दिया जाता है ! जिसपर यकीन करना ना करना बराबर होता है !
____________ आज ज़ुरूरतन मुझे भी लिखना है " परिचय " .मेरे खयाल से एक writer के नाते मेरा अनौपचारिक परिचय संक्षेप कुछ यूँ होना चाहिए____________
______fb और blog पर मेरी शुरुआत " हाइकू " के साथ हुई !
______ u tube पर मेरी कविताएँ सुनी जा सकती हैं !
______ वि.वि.से मुझे ' योग - विशेषग्य " की उपाधि प्राप्त है .
______ नईदुनिया , दैनिक भास्कर , नवभारत टाइम्स , राष्ट्रीय सहारा, संडे-मेल ने मेरे लेख ,कहानी और कविताएँ प्रकाशित की हैं .
______ कादम्बिनी साहित्य महोत्सव में मुझ कहानिकार को पुरस्कृत किया गया है .
_______ हिंदी ,धर्म , दर्शन , योग , मनोविज्ञान , ज्योतिष मेरे अध्ययन के प्रिय विषय हैं .
______ अपने नाम के "स्वाति " की स्पेलिंग " sowaty " लिखती हूँ :)
___________________________ डॉ. प्रतिभा " स्वाति
पिता का नाम ___
जन्म स्थान---
पता ____
जन्म तारीख ---
शिक्षा ----
व्यवसाय ---
उपलब्धि ----
अनुभव ----
अभिरुचि ----
अन्य /विशेष __
_________________________________________ या फ़िर
कन्या का नाम __
राशि __
गोत्र ___
.
.
.
____________ या फ़िर फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल में जो परिचय दिया जाता है ! जिसपर यकीन करना ना करना बराबर होता है !
____________ आज ज़ुरूरतन मुझे भी लिखना है " परिचय " .मेरे खयाल से एक writer के नाते मेरा अनौपचारिक परिचय संक्षेप कुछ यूँ होना चाहिए____________
______fb और blog पर मेरी शुरुआत " हाइकू " के साथ हुई !
______ u tube पर मेरी कविताएँ सुनी जा सकती हैं !
______ वि.वि.से मुझे ' योग - विशेषग्य " की उपाधि प्राप्त है .
______ नईदुनिया , दैनिक भास्कर , नवभारत टाइम्स , राष्ट्रीय सहारा, संडे-मेल ने मेरे लेख ,कहानी और कविताएँ प्रकाशित की हैं .
______ कादम्बिनी साहित्य महोत्सव में मुझ कहानिकार को पुरस्कृत किया गया है .
_______ हिंदी ,धर्म , दर्शन , योग , मनोविज्ञान , ज्योतिष मेरे अध्ययन के प्रिय विषय हैं .
______ अपने नाम के "स्वाति " की स्पेलिंग " sowaty " लिखती हूँ :)
___________________________ डॉ. प्रतिभा " स्वाति
शुक्रवार, मई 13, 2016
दिल ...दिमाग ...और हम
_____________________________________________________________
दिमाग राजा है! दिल मंत्री!शरीर दास !
_____ये कौन कब ? किसलिए ? किस मन: स्थिति और मानसिकता में कह गया ! इस सोच को समझने की ज़ुरूरत है !
_____________________________________________________________________
____________________
_______दिल तो बच्चे की मानिंद है ! चाँद की जानिब हाथ फैलवा ही देता है ! दिमाग जानता है , चाँद की असलियत और इन्सान की औकात या हैसियत ! दिमाग कभी चाँद नहीं मांगता ! जिसके दिमाग ने चाँद माँगा वो , चाँद तक पहुंचा . सारी दुनिया इस सच से वाकिफ़ है
________________________________
___________ गोया के ये तय किया जाना आसान नहीं कि दिल की माने या नहीं ? लेकिन ये तय है की दिमाग की मानी जानी चाहिए . इसके पीछे जो वजह है ,निश्चय ही उसे दिमाग की बदौलत ही खोजा गया होगा ....... क्यूंकि दिल तो महज एक पम्प है :) रक्त शोधक और शुद्ध रक्त के लिए शरीर जिसपर निर्भर है 'वो ' अवयव :)
लेकिन ' ब्रेन " के कमाल को विज्ञान ने प्रमाण दे -दे कर , बेचारे दिल को सोच -समझ से सर्वथा दूर कर दिया !
___________ लेकिन दिमाग कितनी भी अपनी मनवा ले लेकिन ' दिल ' धड़कना बंद कर दे तब सारी होशियारी एक तरफ़ और ..........बोले तो , कोई किसी से कम नहीं !
_____________ ईश्वर ने शरीर में कोई भी चीज़ बेवजह नहीं बनाई , हाँ इन्सान उस वजह को बेवजह साबित करदे ये हुनर रखता है ! इन्सान की फ़ितरत ही कुछ ऐसी है ! ऐसी क्यूँ हैं का जवाब जब विज्ञान ने तलाश के नहीं दिया तो ' मनोविज्ञान ' ने कुछ ख़ोज और ख़ुलासे अपने जिम्मे कर लिए !
_____________ ठीक है यदि दिल सोच नहीं सकता तो हम उस सोच की तरफ़ चलें जहां दिमाग सीधा हस्तक्षेप नहीं करता ! मनोविज्ञान ने अपना जाल धीरे -से फैलाया ________ चेतन - अर्धचेतन -अचेतन ______ जी हाँ , ये मन की अवस्थाएँ हैं :)
________________ डॉ . प्रतिभा स्वाति
___________ गोया के ये तय किया जाना आसान नहीं कि दिल की माने या नहीं ? लेकिन ये तय है की दिमाग की मानी जानी चाहिए . इसके पीछे जो वजह है ,निश्चय ही उसे दिमाग की बदौलत ही खोजा गया होगा ....... क्यूंकि दिल तो महज एक पम्प है :) रक्त शोधक और शुद्ध रक्त के लिए शरीर जिसपर निर्भर है 'वो ' अवयव :)
लेकिन ' ब्रेन " के कमाल को विज्ञान ने प्रमाण दे -दे कर , बेचारे दिल को सोच -समझ से सर्वथा दूर कर दिया !
___________ लेकिन दिमाग कितनी भी अपनी मनवा ले लेकिन ' दिल ' धड़कना बंद कर दे तब सारी होशियारी एक तरफ़ और ..........बोले तो , कोई किसी से कम नहीं !
_____________ ईश्वर ने शरीर में कोई भी चीज़ बेवजह नहीं बनाई , हाँ इन्सान उस वजह को बेवजह साबित करदे ये हुनर रखता है ! इन्सान की फ़ितरत ही कुछ ऐसी है ! ऐसी क्यूँ हैं का जवाब जब विज्ञान ने तलाश के नहीं दिया तो ' मनोविज्ञान ' ने कुछ ख़ोज और ख़ुलासे अपने जिम्मे कर लिए !
_____________ ठीक है यदि दिल सोच नहीं सकता तो हम उस सोच की तरफ़ चलें जहां दिमाग सीधा हस्तक्षेप नहीं करता ! मनोविज्ञान ने अपना जाल धीरे -से फैलाया ________ चेतन - अर्धचेतन -अचेतन ______ जी हाँ , ये मन की अवस्थाएँ हैं :)
________________ डॉ . प्रतिभा स्वाति
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