हास्य -व्यंग्य ----------- प्रचलन में है ! पर कई बार जब --- हास / परिहास / उपहास के भेद भुला दिए ,जाते हैं तब होता है कोई आहत / और कोई , जिसे पता भी नहीं होता कि / अनजाने में कोई अपराध हुआ है !
------- net problem होने पर कई बार g + / open ही नहीं होता , blog वो ज़रिया बन जाता है ,जहाँ से अपनी बात / आप तक पहुंचाती हूँ ! हर बार 5 gb खत्म होने के बाद , इस मुश्किल से आप भी गुज़रते हैं ?
लेखन कभी खुद के लिये होता है / कभी सबके लिये ! लेकिन ..... वह कभी पूरा नहीं होता ! ये विकास की संभावना है या अभिव्यक्ति का पुरज़ोर तकाज़ा ? हर बार विराम लगाने का प्रयास / प्रश्नचिन्ह बन जाता है !....... ------------------------ डॉ . प्रतिभा स्वाति
रात में / उस पात पर ..... . जुगनू जब मचलता है ! सचमुच / शाख को तभी ..... रात का / पता चलता है ! ....................................... डॉ . प्रतिभा स्वाति