मंगलवार, जून 03, 2014

लेखन....


             लेखन कभी खुद के   लिये होता है / कभी सबके लिये ! लेकिन ..... वह कभी पूरा नहीं होता ! ये विकास की संभावना है या अभिव्यक्ति का पुरज़ोर तकाज़ा ?
          हर बार विराम लगाने का प्रयास / प्रश्नचिन्ह बन जाता है !.......
------------------------ डॉ . प्रतिभा स्वाति
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

-----------Google+ Followers / mere sathi -----------