गुरुवार, जून 12, 2014

व्यंग्य

               हास्य -व्यंग्य ----------- प्रचलन में है ! पर  कई बार जब --- हास / परिहास / उपहास के भेद  भुला दिए ,जाते हैं तब होता है कोई आहत / और कोई , जिसे पता भी नहीं होता कि / अनजाने में कोई अपराध हुआ है !
----------------------- डॉ. प्रतिभा स्वाति

    
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

-----------Google+ Followers / mere sathi -----------