शुक्रवार, मार्च 14, 2014
शुक्रवार, मार्च 07, 2014
गुरुवार, मार्च 06, 2014
सपने
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तेरे इरादे / तेरी लाचारियाँ ,
मैं, वाकिफ़ हूँ / सब ही से !
क़िस्से , नए गढ़ - गढ़ के ,
बता नहीं ........ तू मुझको !
देखती हूँ / रोज़ ही सपने ,
जागते और सोते हुए !
होते नहीं हैं सच ,
क्या पता नहीं मुझको ?
------------------------------------ डॉ.प्रतिभा स्वाति
बुधवार, मार्च 05, 2014
4 frnds
आज फिर net problm !
आज फिर नहीं कह pai शुक्रिया !
आज फिर / तमाम बातें / यूँ ही रह गई !
किसी भी कमेंट का जवाब नहीं click हुआ !
अफ़सोस / एक शर्मिंदगी का अहसास !
g + open नही हुआ !
ब्लॉग / पोस्ट publish हो रही हैं ! बस !
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आज फिर नहीं कह pai शुक्रिया !
आज फिर / तमाम बातें / यूँ ही रह गई !
किसी भी कमेंट का जवाब नहीं click हुआ !
अफ़सोस / एक शर्मिंदगी का अहसास !
g + open नही हुआ !
ब्लॉग / पोस्ट publish हो रही हैं ! बस !
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शनिवार, फ़रवरी 22, 2014
मन पूछता है बस ...
मन पूछता है / बस !
कभी/उत्तर नहीं देता
उत्तर ही की ख़ोज में,
प्रश्न /ले जाते हैं/उसे ,
बियाबान में / बीहड़ में!
उन अकेली / अँधेरी ,
कंदराओं.............. में!
जहां
हर श्वास
लीन हो जाती है
अटूट ध्यान में
हो जाता है
संसार विस्मृत
जागती है कुण्डलिनी शक्तियाँ ?
भ्रमित करती हैं अष्ट सिद्धियाँ ?
तब - यम, नियम प्राणायाम
प्रत्याहार ,ध्यान और धारणा
मन को कर देते हैं मौन ,
जाग उठता है सहस्त्रार
चिर निद्रित समाधि के बाद
कौन लौटा है चिर प्रतीक्षित
प्रश्नों को
उत्तरों से संतुष्ट करने
आज भी प्रश्न
मन को ले जाते हैं
उत्तर की ख़ोज में
और उत्तर हर बार की तरह
नहीं लौटते प्रश्नों के पास .......
डॉ. प्रतिभा स्वाति
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