शनिवार, जून 23, 2018

भक्ति को मत तोलो राधे ......

 कान्ह  - कान्ह  रटते  सूर ...
कृष्ण  कुटिर -द्वार  पर !
दिव्य -दृष्टि  वरदान  में ले ...
आए  करुण  पुकार  पर !

राधिका  भी  साथ  थीं ..
अधर वक्र  मुस्कान  थी !
भाव  भक्त  का  तौलतीं ...
भक्ति  से अनजान  थीं !

और क्या  कुछ  चाहिए...
 पूछिये  प्रभु  इनसे  ज़रा !
हुए  विव्हल  कृष्ण  भी ....
मिला सूर से उत्तर खरा !

दिव्य -दृष्टि से तुमको  देखा ...
प्रभु और न कछु  चाहिए !
इस छबी पर  मर मिटा  मैं ...
वरदान  प्रभु  ले  जाइये !

तनिक  लज्जित  थीं राधिका ...
उलझा  दिया  था  प्रश्न  ने !
भक्त  मेरे ,मैं  भक्त  का ...
उर से  लगाया  कृष्ण  ने !

_________________________ डॉ . प्रतिभा  स्वाति
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