रविवार, दिसंबर 25, 2016

सलीब पर .....

ज़िन्दगी ने
जो मुझे दिया
ख़ुशी से लिया !

 पियाला भर
जहर
उमर भर  !

पिया  मैंने
बूंद -बूंद
जिया मैंने !

न जीने से
डर ....
नहीं
मरने की
 फिकर !

विष कभी
कर देता
किसीको
 अमर !

जिसे समझे
मृत्यु
किसे  समझे !

न विलाप
ना मातम
क़िस्सा शुरू
या खतम

मुक्ति
नही मिलती
जीवन से
गम  से
पुनर जनम से

अमृत घट
फ़िर वही कपट

इस वर्तुल में
उपक्रम से
सब मिलता है
नियति नट
जीवन संकट

फ़िर भी
मृत्यु से  डर
मांगता वर
हुआ कोई अमर
रे अंत को वर
ख़ुश होकर
फ़िर ..
शुरुआत कर !
चढ़ सलीब पर ...........
__________________ डॉ . प्रतिभा  स्वाति










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