गुरुवार, जून 02, 2016

बात जारी है ....

  रक्षा -कवच 
 पैने नख़ करता 
  ख़ुद मरता 
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      ये हाइकू है ?  मुझ  जैसे लोग इसे हाइकू तो कहेंगे पर पसंद नहीं करेंगे ! अरे ,कोई कवि इतना हिंसक  कैसे हो सकता है ? हिंसा -पसंद भी कैसे कर सकता है ? कवि तो कोमल व्यवहार और स्वभाव के लिए जाना जाता था !
____________ वीर और भयानक रस के कवि बिरले होते हैं ! भले रीतिकाल  गुज़र गया ,पर भूषण के वंशज उसका .1 % लेकर अब भी जीवित हैं ,काव्य सरोवर में !लिख रहे हैं श्रंगार -प्यार -व्यापार !
_इसकी तमाम वजहें हैं , मनोविज्ञान की नज़र जिनपर है !ये बात आज जारी  रहेगी _______________ देहली के वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप पंडित आगरा आए हुए हैं , मेरी खातिर ....इस विषय  पर उनकी टिप्पणी से आपको अवगत करवाउंगी !
_________________ डॉ. प्रतिभा स्वाति




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