शुक्रवार, मई 30, 2014

यूँ हि कोई...

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रहमतें  तेरी / और गुरुर  है  मुझमें !
सच / तेरा ही तो /  नूर  है  मुझमें !

यूँ ही कोई ............खुदा नहीं होता !
ख़ास कुछ बात ......ज़ुरूर है तुझमें !
----------------------------------------- डॉ .प्रतिभा स्वाति
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