मंगलवार, जनवरी 20, 2015

सौ चाँद



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इन आँखों के ,
हुनर का कुछ .
अन्दाज़ भी है,
आसमां तुझको ?

इक ख़्वाब में ,
सौ चाँद आते हैं .
और .....सौ ,
आसमां मुझको .
________________________ डॉ. प्रतिभा स्वाति







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