मंगलवार, सितंबर 03, 2013

आधुनिक हाईगा

जब भी कोई नया प्रयोग होता है , उसकीआलोचना के रास्ते खुल जाते हैं .तब उसे सोने को खरा करने की प्रक्रिया में शामिल कर लेती हूँ ! और फिर जब स्वीकार की जड़ें गहरी हों , तब अस्वीकार की बयार भी मन को गुदगुदाती है . आख़िर क्यूँ नही चढ़ पाया ' हाइकू' जन -मानस की जुबान पर ? क्यूँ हाइकू दूसरे देश से आकर यहाँ अज़नबी है ? ये मेरे मन में मुस्कुराते जवाबों के सवाल हैं ! जो आपके सामने तनकर खड़े हैं ! haiga को नए कलेवर में लेकर ! thnx ! ------------------------ डॉ . प्रतिभा स्वाति


1 टिप्पणी:

  1. आज हम सब एक दुसरे पर भरोसा करना तो छोड़ ते ही जा रहे है
    परन्तु अब खुद अपने ऊपर से आत्म विस्वास में कमी और सहन
    सिलता तो दूर दूर तक नही दिखाई दे रही है! भविष्य में भारत के
    लिए यही परेशानी का कारन बनेगा ! ईस देस में कही कोई घटना होती
    तो लोग पुलिस,नेता ,आदालत, सरकार को भल्ला बुरा कहना सुरु कर
    देते है! लेकिन खुद, गीता, और कुरान पर हाथ रख कर लोग झूठी ग्वाही
    देते है ! जहाँ पर 90 पर्तीसत लोग करप्ट हो टेक्स चोर ,झूठे बेईमान
    हो वहाँ की सरकार, पुलिस, आदालत एव नेता राजा हरिश्चंदर जैसे से
    नहीं होंगी ! ईस लिए चाहे जिसको भी स्वतंत्र कर लो
    उससे कोई सुधार होने वाला नही है ! जब तक ज्नार्धान रूपी जानता नही
    सुधारे गी !

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