शुक्रवार, जुलाई 26, 2013

गौरैया....









_________________________________ एक छोटी -सी चिड़िया __ कितने सारे सबक देती है ! उसकी रोज़ की मशक्कत , आकाश नापने की कोशिश , नन्हे चुज़ों को अपनी चोंच से दाना चुगाती  वो कैसी फ़रिश्तों जैसी लगती है ! और दीवार पे जड़ा आइना ___ क्या जादू है उसमें ?  सब काम से फ़ारिग गौरैया रोज़ उसमे अपना अक्स निहारती है ! कुछ कहती है और कभी खफ़ा होकर अपनी छोटी -सी चोंच से उस अंदर वाली गौरैया की चोच को टकराती है ! क्या उसे बाहर लाना चाहती है ? या ख़ुद को पहचान लेती है ? कई बार मैने उससे पूछा , और उसने बताया भी ......पर ये भाषागत विवशता / मैं कुछ भी समझ नहीं पाई ! पर ...समझना चाहती हूँ ....भाषा न सही / एक सम्वेदना मुझे उसके लिए कुछ करने को प्रेरित करती रहेगी / हमेशा !___________ डॉ. प्रतिभा स्वाति


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